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NBA ने 27 राज्य बोर्डों और 2 UT परिषदों को बांटे करीब 1.04 करोड़ रुपये के ABS लाभ

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 24 अक्टूबर 2026 को 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और दो केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के बीच करीब 1.04 करोड़ रुपये की पहुंच और लाभ-साझाकरण (ABS) राशि बांटी। इसका सीधा फ़ायदा राज्य स्तर की जैव विविधता गतिविधियों को मिलेगा, आम किसान को नहीं।

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आपके लिए इसका मतलब

यह पैसा सीधे किसी किसान या आम नागरिक के खाते में नहीं जाता। यह राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश परिषदों को मिलता है, जो इसे जैव विविधता संरक्षण, दस्तावेजीकरण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण पर खर्च करेंगे। आम पाठक को इसके लिए कोई आवेदन नहीं करना है।

मुख्य बातें

  • कुल वितरित राशि: 1,03,63,188 रुपये (करीब 1.04 करोड़)
  • उत्तर प्रदेश को सबसे ज़्यादा 10,35,790 रुपये
  • मध्य प्रदेश को 9,81,132 रुपये और बिहार को 7,95,968 रुपये
  • यह राशि तीन कंपनियों के लाभ-साझाकरण योगदान से आई
  • NBA अब तक ABS लाभ के रूप में 204 करोड़ रुपये से ज़्यादा जारी कर चुका है
  • कृषि क्षेत्र ने ABS योगदान के रूप में करीब 87 करोड़ रुपये जुटाए हैं

क्या हुआ है

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और दो केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के बीच करीब 1.04 करोड़ रुपये की पहुंच और लाभ-साझाकरण (ABS) राशि बांटी है। सूचना के मुताबिक कुल वितरित राशि 1,03,63,188 रुपये है।

यह राशि क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड, सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड और ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से मिले लाभ-साझाकरण योगदान से आई है। ये कंपनियों ने अनुसंधान और व्यावसायिक काम के लिए कृषि जैविक संसाधनों का इस्तेमाल किया, और उसके बदले में यह योगदान दिया।

किन फसलों से जुड़ा है मामला

सूचना के अनुसार यह योगदान बाजरा, ज्वार, मक्का, चावल और लौकी के इस्तेमाल से जुड़ा है। ये फसलें भारत की कृषि जैव विविधता का अहम हिस्सा मानी गई हैं, जो खाद्य सुरक्षा, खेती से जुड़ी आजीविका और कृषि में नवाचार को सहारा देती हैं।

पैसा कैसे बांटा गया

NBA ने बंटवारे के लिए क्षेत्र-आधारित तरीका अपनाया। सूचना में बताया गया है कि पहले जैविक संसाधन बाजारों, व्यापारियों या बिचौलियों के जरिए मिलते थे, इसलिए व्यक्तिगत लाभार्थियों की पहचान आसान नहीं होती थी। इसलिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिश और प्राधिकरण की मंज़ूरी से यह वितरण व्यवस्था अपनाई गई।

आवंटन उन जैविक संसाधनों के अनुमानित कृषि क्षेत्र के अनुपात में तय किया गया, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के एकीकृत कृषि सांख्यिकी पोर्टल के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित था।

किस राज्य को कितना

सूचना में दी गई तालिका के मुताबिक उत्तर प्रदेश को 10,35,790 रुपये, महाराष्ट्र को 10,05,218 रुपये, मध्य प्रदेश को 9,81,132 रुपये और बिहार को 7,95,968 रुपये मिले हैं। पश्चिम बंगाल को 7,91,609 रुपये, कर्नाटक को 7,34,400 रुपये, तेलंगाना को 5,76,934 रुपये, छत्तीसगढ़ को 5,20,524 रुपये, ओडिशा को 4,99,655 रुपये और राजस्थान को 4,87,874 रुपये मिले हैं। बाकी राज्यों के लिए मिलाकर 29,34,084 रुपये का आवंटन है।

यह पैसा किस काम आएगा

सूचना के अनुसार यह धन जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के लागू प्रावधानों के तहत खर्च होगा। इसमें जैव विविधता का संरक्षण और स्थायी उपयोग, दस्तावेजीकरण, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और स्थानीय जैव विविधता कामों को मज़बूत करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

बड़ा संदर्भ

सूचना में बताया गया है कि कृषि क्षेत्र ने ABS योगदान के रूप में करीब 87 करोड़ रुपये जुटाए हैं। NBA अब तक ABS लाभ के रूप में 204 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि जारी कर चुका है। भारत का ABS ढांचा जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित), जैविक विविधता नियम, 2024 और पहुंच और लाभ-साझाकरण विनियम, 2025 से चलता है। अधिनियम की धारा 21 जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से मिलने वाले लाभ को उचित और न्यायसंगत तरीके से बांटने का प्रावधान करती है।

सूचना के मुताबिक 28 अक्टूबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवन में सीबीडी सीओपी 17 कार्यक्रम में भारत ABS लागू करने का अपना अनुभव पेश करेगा।

सवाल-जवाब

ABS का पूरा नाम क्या है?

ABS का मतलब है पहुंच और लाभ-साझाकरण (Access and Benefit Sharing)। इसका मतलब है कि जैविक संसाधनों के इस्तेमाल से जो लाभ मिले, उसे उचित तरीके से बांटना।

यह पैसा किसे मिला है?

यह राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और दो केंद्र शासित प्रदेश जैविविधता परिषदों को दी गई है। यह सीधे किसानों या आम लोगों को नहीं दी गई।

उत्तर प्रदेश को कितने रुपये मिले?

उत्तर प्रदेश को 10,35,790 रुपये मिले, जो सूची में सबसे ज़्यादा है। इसके बाद महाराष्ट्र को 10,05,218 रुपये और मध्य प्रदेश को 9,81,132 रुपये मिले।

यह पैसा किस काम में खर्च होगा?

यह धन जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार जैव विविधता संरक्षण, दस्तावेजीकरण, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और स्थानीय जैव विविधता कामों को मज़बूत करने में लगेगा।

क्या आम किसान इसके लिए आवेदन कर सकता है?

नहीं, सूचना में आम किसान के आवेदन का कोई ज़िक्र नहीं है। यह राशि राज्य बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश परिषदों को दी गई है।

स्रोत: PIB, "कृषि जैविक संसाधन ने पूरे भारत में जैव विविधता पहल के लिए एबीएस लाभ के रूप में लगभग 1.04 करोड़ रुपये जुटाए हैं", 24 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

यह रोज़मर्रा की सूचना आधिकारिक स्रोत से AI की मदद से लिखी गई और अपने-आप छपी; संपादक इसे छपने के बाद जाँचते हैं। गलती बताएँ