भारत में Ramsar स्थलों की संख्या 103 हुई, UP में सबसे ज़्यादा 14 स्थल
केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक भारत में Ramsar स्थलों की संख्या 15 अक्टूबर 2026 तक बढ़कर 103 हो गई है। यह जानकारी उन लोगों के लिए है जो आर्द्रभूमि, पक्षियों और पर्यावरण से जुड़े विषयों में रुचि रखते हैं।
आपके लिए इसका मतलब
आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि देश में ज़्यादा झीलों और दलदली इलाकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। इन जगहों पर पक्षी देखने जाने वाले लोगों और स्थानीय लोगों को इन आर्द्रभूमियों के संरक्षण की जानकारी रखनी चाहिए। इस खबर में किसी आवेदन, पैसे या आखिरी तारीख का ज़िक्र नहीं है, इसलिए आम नागरिक को कोई कदम उठाने की ज़रूरत नहीं है।
मुख्य बातें
- भारत में Ramsar स्थलों की संख्या 2014 में 26 थी, जो 15 अक्टूबर 2026 तक 103 हो गई।
- ये स्थल 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13.87 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैले हैं।
- स्थलों की संख्या के हिसाब से भारत एशिया में पहले और दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
- तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 20 स्थल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है।
- सुखना आर्द्रभूमि (चंडीगढ़) और सौज झील (उत्तर प्रदेश) को सबसे हाल में सूची में शामिल किया गया।
क्या बदला है
केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों यानी Ramsar स्थलों की संख्या 15 अक्टूबर 2026 तक बढ़कर 103 हो गई है। साल 2014 में ऐसे स्थलों की संख्या 26 थी। यानी इनकी संख्या लगभग चार गुना बढ़ी है। ये स्थल 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13.87 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैले हैं।
स्थलों की संख्या के हिसाब से भारत का नेटवर्क एशिया में पहले और दुनिया में तीसरे स्थान पर है। सबसे हाल में चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि और उत्तर प्रदेश की सौज झील को सूची में शामिल किया गया।
Ramsar स्थल क्या होते हैं
Ramsar कन्वेंशन एक अंतर-सरकारी संधि है जिसे 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में स्वीकृत किया गया था और 1975 में लागू किया गया। अक्टूबर 2026 तक इसमें 172 संविदाकारी पक्ष हैं और दुनिया भर में 2,536 से ज़्यादा स्थल Ramsar स्थल के रूप में नामित हैं। भारत 1 फरवरी 1982 को इस कन्वेंशन का पक्षकार बना।
Ramsar स्थल ऐसी आर्द्रभूमि होती है जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में नामित किया गया है। आर्द्रभूमि में दलदल, दलदली भूमि, पीटभूमि या पानी वाले ऐसे क्षेत्र आते हैं जहाँ मीठा, खारा या लवणीय पानी पाया जाता है। ये आर्द्रभूमियाँ मीठे पानी का भंडारण करती हैं, भूजल का पुनर्भरण करती हैं, बाढ़ के प्रभाव को कम करती हैं और मत्स्य पालन तथा कृषि को बनाए रखती हैं। ये प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता को भी आश्रय देती हैं।
किसे फ़ायदा होगा
जानकारी के मुताबिक Ramsar सूची में शामिल होने से स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और उनके संरक्षण के लिए समर्थन मजबूत हो सकता है। इससे देशों को अंतर-सरकारी मंच पर अपनी बात रखने का मौका मिलता है और विशेषज्ञ सलाह तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिल सकता है।
नामांकन के बाद संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सरकार को उस आर्द्रभूमि और उसके संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना होता है। स्थल को आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित माना जाता है और Ramsar सूचना पत्रक हर छह साल में अद्यतन करना होता है।
किन राज्यों में कितने स्थल
तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 20 Ramsar स्थल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश के सुरहा ताल को जून 2026 में भारत का 100वाँ स्थल बनाया गया था। अकेले साल 2025 में 11 आर्द्रभूमियों को Ramsar सूची में शामिल किया गया था।
सौज झील उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में बाढ़ के मैदान की एक उथली झील है, जहाँ 30,000 से ज़्यादा जलीय पक्षी नियमित रूप से आते हैं। यह सारस और बृहद चित्तीदार चील जैसी लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों को घोंसले बनाने और भोजन की तलाश के लिए आवास देती है।
आगे क्या
जानकारी में बताया गया है कि भारत सरकार आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के आधार पर जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय योजना (एनपीसीए), अमृत धरोहर, मिष्टी और मिशन सहभागिता के ज़रिए वैज्ञानिक और जनभागीदारी आधारित संरक्षण को बढ़ावा दे रही है। इस खबर में आम नागरिकों के लिए किसी आवेदन या आखिरी तारीख का ज़िक्र नहीं है।
सवाल-जवाब
भारत में कुल कितने Ramsar स्थल हैं?
15 अक्टूबर 2026 तक भारत में 103 Ramsar स्थल हैं। ये 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13.87 लाख हेक्टेयर से ज़्यादा क्षेत्र में फैले हैं।
Ramsar स्थल क्या होता है?
Ramsar स्थल ऐसी आर्द्रभूमि होती है जिसे Ramsar कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में नामित किया गया है। इन्हें उनके पारिस्थितिक, वनस्पति, प्राणी या जल संबंधी महत्व के लिए मान्यता दी जाती है।
किस राज्य में सबसे ज़्यादा Ramsar स्थल हैं?
तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 20 Ramsar स्थल हैं। उत्तर प्रदेश 14 स्थलों के साथ दूसरे स्थान पर है।
सौज झील कहाँ है और इसे Ramsar स्थल क्यों बनाया गया?
सौज झील उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में बाढ़ के मैदान की एक उथली झील है। यहाँ 30,000 से ज़्यादा जलीय पक्षी नियमित रूप से आते हैं और यह सारस तथा बृहद चित्तीदार चील जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों को आश्रय देती है।
Ramsar स्थल बनने के बाद क्या ज़िम्मेदारी होती है?
नामांकन के बाद संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश सरकार को उस आर्द्रभूमि और उसके संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना होता है। स्थल को आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित माना जाता है और Ramsar सूचना पत्रक हर छह साल में अद्यतन करना होता है।
स्रोत: PIB, "भारत में रामसर स्थल", 25 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें
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