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Bihar नदी संजीवनी: नदियों से गाद निकलेगी, highway बनाने में लगेगी

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार ने 3 नवंबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत बिहार की नदियों और जल निकायों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी और उसे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जाएगा। इसका असर बिहार के किसानों, बाढ़ प्रभावित इलाकों और राजमार्ग निर्माण से जुड़े कामों पर पड़ेगा।

सांकेतिक तस्वीर · Pixabay (Seregei)
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आपके लिए इसका मतलब

यह समझौता सीधे किसी व्यक्ति से आवेदन नहीं मांगता, इसलिए आम लोगों को कुछ भरना या करना नहीं है। बिहार में रहने वाले लोगों, खासकर बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को इससे लंबे समय में फ़ायदा मिल सकता है, क्योंकि नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ने और बाढ़ का जोखिम घटने की बात कही गई है। बाढ़ के बाद खेतों पर जमी रेत और गाद हटाने की सुविधा भी राज्य की नीति में बताई गई है।

मुख्य बातें

  • समझौता ज्ञापन पर 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए।
  • 16 निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 243 लाख घन मीटर गाद के उपयोग का लक्ष्य है।
  • 27 भावी परियोजनाओं के लिए 835 लाख घन मीटर गाद के उपयोग का प्रस्ताव है।
  • बिहार में NH की 39 परियोजनाएं बन रही हैं, जिनमें लगभग 58,340 करोड़ रुपये का निवेश बताया गया है।
  • बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 2014 के 4,615 किलोमीटर से बढ़कर अब लगभग 6,500 किलोमीटर हो गया है।
  • बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग नोडल विभाग होगा।

क्या हुआ है

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत बिहार में चिह्नित नदियों और दूसरे जल निकायों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी और उस गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में किया जाएगा। इस पहल को ‘नदी संजीवनी’ कहा गया है। समझौते पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी और बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए।

यह क्यों किया जा रहा है

सूचना के अनुसार नदियों में बड़ी मात्रा में गाद जमा होने से उनकी जलधारण क्षमता पर बुरा असर पड़ा है, जिससे बाढ़ और कृषि भूमि व संपत्ति के नुकसान जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। बिहार को बार-बार बाढ़ और जल संकट का सामना करना पड़ता है, और नेपाल से निकलने वाली नदियां भारी मात्रा में पानी और गाद लेकर राज्य में प्रवेश करती हैं। सूचना में कहा गया है कि गाद निकालने से जल प्रवाह और जल निकासी सुधरेगी, जल निकायों का पुनरुद्धार होगा और राजमार्ग निर्माण के लिए सामग्री भी मिलेगी।

राजमार्ग परियोजनाओं में गाद का उपयोग

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गाद के उपयोग की संभावनाएं पहचानी हैं। सूचना के मुताबिक 16 निर्माणाधीन परियोजनाओं में 243 लाख घन मीटर उपयुक्त गाद का उपयोग किया जाएगा, जबकि 27 भावी परियोजनाओं में अनुमानित 835 लाख घन मीटर गाद के उपयोग का प्रस्ताव है। गाद का उपयोग तकनीकी उपयुक्तता और जरूरी स्वीकृतियों के अंतर्गत ही किया जाएगा।

फिलहाल बिहार में NHAI की लगभग 1,561 किलोमीटर लंबाई की 39 परियोजनाएं बन रही हैं, जिनमें अनुमानित 58,340 करोड़ रुपये का निवेश बताया गया है। इसके अलावा लगभग 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 अन्य परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें अनुमानित 1,85,200 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

काम कैसे होगा और निगरानी कौन करेगा

बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग नोडल विभाग के रूप में काम करेगा। प्रस्तावों की जांच, स्वीकृतियां देने में सुविधा, कार्यान्वयन की निगरानी और परिचालन संबंधी समस्याओं का समाधान राज्य स्तरीय समन्वय समिति करेगी। चिह्नित जल निकायों का विस्तृत तकनीकी आकलन करने के बाद ही गाद निकाली जाएगी, और अनुमति केवल स्वीकृत स्थलों पर तय तकनीकी सीमाओं के भीतर दी जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गाद निकालने से नदी के इको-सिस्टम, नदी तटों, तटबंधों, पुलों और दूसरी संरचनाओं पर बुरा असर न पड़े।

बिहार सरकार की नीति और किसानों को राहत

बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकायों के पुनरुद्धार और गाद प्रबंधन के लिए ‘बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026’ तैयार की गई है। सूचना के अनुसार यह नीति बाढ़ के बाद कृषि भूमि पर जमी रेत और गाद हटाने की सुविधा भी देती है, जिससे प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है

इस समझौते में आम लोगों के लिए कोई आवेदन, फ़ॉर्म या तारीख नहीं दी गई है, इसलिए किसी को कुछ करने की जरूरत नहीं है। सूचना में बताए गए फ़ायदे — बाढ़ का जोखिम कम होना, सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ना और कृषि भूमि का संरक्षण — लंबी अवधि के हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग या सरकारी सूचना पर निर्भर रहें।

सवाल-जवाब

Bihar नदी संजीवनी योजना क्या है?

यह नदियों और जल निकायों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने और उस गाद को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में इस्तेमाल करने की पहल है। इसके लिए केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

क्या आम लोगों को इसके लिए कुछ करना है?

नहीं, इस समझौते में आम लोगों के लिए कोई आवेदन या फ़ॉर्म नहीं है। गाद निकालने का काम चिह्नित जल निकायों के तकनीकी आकलन के बाद किया जाएगा।

गाद निकालने से किसे फ़ायदा होगा?

सूचना के अनुसार इससे नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, जल निकासी सुधरेगी और बाढ़ का जोखिम कम होने में मदद मिलेगी। साथ ही सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने और भूजल पुनर्भरण की बात कही गई है।

बाढ़ के बाद खेतों पर जमी रेत-गाद हटाने की बात कहां कही गई है?

सूचना के मुताबिक 'बिहार जल स्रोत पुनरुद्धार एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026' में बाढ़ के बाद कृषि भूमि पर जमी रेत और गाद हटाने की सुविधा का प्रावधान बताया गया है। इससे प्रभावित किसानों को राहत मिलने की बात कही गई है।

गाद निकालने की निगरानी कौन करेगा?

बिहार सरकार का सड़क निर्माण विभाग नोडल विभाग होगा। प्रस्तावों की जांच, स्वीकृति, कार्यान्वयन की निगरानी और परिचालन संबंधी समस्याओं का समाधान राज्य स्तरीय समन्वय समिति करेगी।

स्रोत: PIB, "सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच जल निकायों से गाद की वैज्ञानिक तरीके से निकासी तथा गाद के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में उपयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर", 3 नवंबर 2026. मूल सूचना देखें

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