AIIA की रिपोर्ट: फरीदाबाद में बुजुर्गों पर आयुर्वेद कार्यक्रम के उत्साहजनक नतीजे
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) ने 27 अक्टूबर को बताया कि हरियाणा के फरीदाबाद में बुजुर्गों पर चलाए गए सामुदायिक आयुर्वेद कार्यक्रम में जीवन गुणवत्ता और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिले हैं। यह रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई है और इसके नतीजे अभी शुरुआती हैं।
आपके लिए इसका मतलब
यह खबर सीधे तौर पर आम लोगों के लिए कोई नई योजना या आवेदन नहीं खोलती। यह एक शोध परियोजना के नतीजे हैं, जो फरीदाबाद के 60 से 80 साल के बुजुर्गों पर किए गए अध्ययन से जुड़े हैं। रिपोर्ट में खुद कहा गया है कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन और आगे के अध्ययन जरूरी हैं। इसलिए इसे किसी इलाज की गारंटी न समझें और अपनी दवा या इलाज में बदलाव डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
मुख्य बातें
- फरीदाबाद के 60 से 80 वर्ष के 5,594 बुजुर्गों की तीन महीनों में स्क्रीनिंग की गई और आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं।
- डिमेंशिया पर केंद्रित दूसरे हिस्से में चार महीनों में 200 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई।
- शुरुआती जांच में 67.73 प्रतिशत में दृष्टि संबंधी समस्या, 43.05 प्रतिशत में शारीरिक निष्क्रियता और 6.85 प्रतिशत में संज्ञानात्मक क्षमता में कमी मिली।
- पहले हिस्से में WHOQOL स्कोर 292.0 से बढ़कर 326.3 हुआ और अग्निबल के सभी छह मानकों में सुधार दर्ज हुआ।
- दूसरे हिस्से में जीवन गुणवत्ता का स्कोर 277.4 से बढ़कर 364.2 दर्ज किया गया।
- नतीजे 24 अक्टूबर को AIIA में एक कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए और रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई।
क्या हुआ है
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बुजुर्गों के लिए एक सामुदायिक आयुर्वेद कार्यक्रम चलाया था। संस्थान के अनुसार इस कार्यक्रम के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। परियोजना की रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंप दी गई है।
AIIA, आयुष मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है, जो आयुर्वेद में शिक्षा, अनुसंधान, इलाज और जन-स्वास्थ्य पहलों पर काम करता है।
किस पर हुआ अध्ययन
परियोजना का नाम “हरियाणा राज्य के फरीदाबाद जिले की वृद्ध आबादी में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के लिए सामुदायिक आयुर्वेद हस्तक्षेप” है। इसका मकसद सामुदायिक स्तर पर आयुर्वेद आधारित उपचार की संभावनाओं को समझना और स्वस्थ वृद्धावस्था के उपायों का आकलन करना था।
संस्थान की जन-स्वास्थ्य पहल के तहत तीन महीनों में फरीदाबाद के 60 से 80 वर्ष आयु वर्ग के 5,594 बुजुर्गों की स्क्रीनिंग की गई और उन्हें आयुर्वेदिक औषधियां दी गईं। डिमेंशिया (मनोभ्रंश) पर केंद्रित दूसरे हिस्से में चार महीनों में 200 मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें आयुर्वेद आधारित औषधियां दी गईं।
शुरुआत में क्या पता चला
कार्यक्रम की शुरुआती जांच में बुजुर्गों की सेहत से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आईं। इनमें 67.73 प्रतिशत प्रतिभागियों में दृष्टि संबंधी समस्या, 43.05 प्रतिशत में शारीरिक निष्क्रियता और 6.85 प्रतिशत में संज्ञानात्मक क्षमता में कमी दर्ज की गई।
कई बुजुर्गों में उच्च रक्तचाप, रैंडम ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर, अस्थि खनिज घनत्व में कमी, कब्ज और नींद संबंधी समस्याएं भी पाई गईं।
क्या सुधार दर्ज हुआ
परियोजना के पहले हिस्से में 60 दिनों तक हस्तक्षेप के बाद जीवन गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन गुणवत्ता आकलन (WHOQOL) का कुल स्कोर 292.0 से बढ़कर 326.3 हो गया। आयुर्वेद में पाचन और चयापचय संबंधी क्षमता के आकलन से जुड़े अग्निबल के सभी छह मानकों में भी सुधार देखा गया। अस्थि खनिज घनत्व में भी सुधार दर्ज हुआ।
संज्ञानात्मक स्वास्थ्य पर केंद्रित दूसरे हिस्से में मिनी मेंटल स्टेट एग्जामिनेशन (MMSE) के स्कोर में सामान्य स्तर की ओर बदलाव देखा गया। 6-सीआईटी आकलन में भी संज्ञानात्मक प्रदर्शन में सुधार के संकेत मिले। इस भाग में जीवन गुणवत्ता का स्कोर 277.4 से बढ़कर 364.2 दर्ज किया गया। सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलीन, डीएचईए और विटामिन डी के स्तरों में भी सुधार पाया गया।
क्या सावधानी जरूरी है
विज्ञप्ति में खुद कहा गया है कि ये नतीजे सामुदायिक स्तर पर आयुर्वेद आधारित हस्तक्षेपों की संभावित उपयोगिता समझने का आधार देते हैं। लेकिन इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन, निरंतर सुरक्षा निगरानी और आगे के अध्ययन जरूरी हैं।
कार्यशाला में क्या कहा गया
नतीजे 24 अक्टूबर को AIIA में आयोजित एक कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए। इसमें आयुष मंत्रालय के सलाहकार डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय मुख्य अतिथि रहे और AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने अध्यक्षता की।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि बुजुर्गों की जरूरतें बेहतर ढंग से समझने के लिए उनसे सार्थक सामाजिक जुड़ाव जरूरी है और उन्हें शारीरिक व मानसिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। प्रो. प्रजापति ने टीम के प्रयासों की सराहना की और ऐसी पहलों को अधिक से अधिक वृद्धजनों तक पहुंचाने पर जोर दिया। कार्यशाला में “हॉलिस्टिक अप्रोच फॉर हेल्दी एजिंग” पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
सवाल-जवाब
AIIA की यह रिपोर्ट किस बारे में है?
यह रिपोर्ट फरीदाबाद के बुजुर्गों पर चलाए गए सामुदायिक आयुर्वेद कार्यक्रम के नतीजों के बारे में है। रिपोर्ट के अनुसार हस्तक्षेप के बाद जीवन गुणवत्ता, अग्निबल और अस्थि खनिज घनत्व में सुधार के संकेत मिले।
क्या इस कार्यक्रम का फायदा यूपी, बिहार या दिल्ली के लोगों को भी मिलेगा?
नहीं, विज्ञप्ति में ऐसा कोई जिक्र नहीं है। यह परियोजना हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बुजुर्गों पर चलाई गई थी और विज्ञप्ति में इसे दूसरे राज्यों तक बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की गई।
क्या यह आयुर्वेदिक दवा का इलाज साबित हो चुका है?
नहीं। विज्ञप्ति में साफ कहा गया है कि इन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन, लगातार सुरक्षा निगरानी और आगे के अध्ययन जरूरी हैं।
रिपोर्ट में कितने बुजुर्गों को शामिल किया गया?
तीन महीनों में 60 से 80 वर्ष आयु वर्ग के 5,594 बुजुर्गों की स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा डिमेंशिया पर केंद्रित हिस्से में चार महीनों में 200 मरीजों की स्क्रीनिंग की गई।
रिपोर्ट अब किसके पास है?
परियोजना की रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंपी गई है। नतीजे 24 अक्टूबर को AIIA में आयोजित कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए थे।
स्रोत: PIB, "अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सुधार के उत्साहजनक संकेत", 27 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें
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