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नशा मुक्ति सेवाओं के लिए JP Nadda ने क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 26 अक्टूबर 2026 को नशा मुक्ति सेवाओं में लगे डॉक्टरों, नर्सों और काउंसलर के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर नहीं, बल्कि नशा छोड़ने का इलाज कराने वाले मरीज़ों को मिलने वाली सेवा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

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आपके लिए इसका मतलब

यह कार्यक्रम आम नागरिकों के लिए सीधे आवेदन वाली योजना नहीं है। इसमें डॉक्टर, नर्स, काउंसलर, साइकोलॉजिस्ट और सोशल वर्कर जैसे स्वास्थ्य कर्मी ट्रेनिंग लेंगे, और उन्हें राज्य सरकारें या केंद्र सरकार नामांकित करेंगी। अगर आप या आपका कोई अपना नशे की लत का इलाज करा रहा है, तो इसका मतलब है कि आगे इलाज करने वाले कर्मियों के पास इस विषय की बेहतर ट्रेनिंग हो सकती है।

मुख्य बातें

  • कार्यक्रम 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ।
  • नारकोटिक कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के तहत मार्च 2029 तक 10,000 सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
  • इस वित्त वर्ष 2,000, 2027-28 में 3,000 और 2028-29 में 5,000 सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • ट्रेनिंग छह संस्थानों के ज़रिए होगी, जिसमें NDDTC, AIIMS नई दिल्ली (गाजियाबाद स्थित) समन्वय केंद्र है।
  • डॉक्टरों के लिए ऑनलाइन लाइव ट्रेनिंग 12 हफ़्ते में हर हफ़्ते होगी, जिसकी कुल क्षमता हर हफ़्ते 300 प्रतिभागियों की है।
  • अब तक विभिन्न राज्यों से 800 से ज़्यादा नामांकन मिल चुके हैं।

क्या शुरू हुआ है

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-1 में एक क्षमता निर्माण ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू किया। यह कार्यक्रम उन डॉक्टरों, नर्सों, काउंसलर और दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों के लिए है जो नशा छुड़ाने की सेवाओं में काम करते हैं। इसका मकसद देश भर में नशे की रोकथाम, पहचान, जाँच, इलाज और देखभाल में लगे कर्मियों की क्षमता मजबूत करना है।

किसे फ़ायदा होगा

इसका सीधा फ़ायदा उन स्वास्थ्य कर्मियों को मिलेगा जो नशे की लत का इलाज करते हैं। इनमें डॉक्टर, नर्स, काउंसलर, साइकोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर और दूसरे मेडिकल व स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं। प्रतिभागियों को राज्य सरकारें नेशनल हेल्थ मिशन के ज़रिए नामांकित करेंगी, और केंद्र सरकार अपनी सेवाओं जैसे सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और रेलवे के ज़रिए नामांकन करेगी। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से फंड मिलने वाले नशा मुक्ति केंद्रों के कर्मी भी इसमें शामिल होंगे।

ट्रेनिंग कैसे होगी

ट्रेनिंग तीन तरीकों से दी जाएगी। डॉक्टरों और मेडिकल ऑफिसर के लिए ऑनलाइन लाइव सेशन होंगे, जो 12 हफ़्ते तक हर हफ़्ते चलेंगे और जिनमें कुल मिलाकर हर हफ़्ते 300 प्रतिभागी जुड़ सकेंगे। इन सेशन में पढ़ाई के साथ क्लिनिकल केस पर चर्चा भी होगी। इसके अलावा चुने हुए लोगों के लिए पाँच दिन का ऑफलाइन प्रशिक्षण होगा, और कर्मियों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए अपनी गति से चलने वाले ऑनलाइन मॉड्यूल भी उपलब्ध होंगे। पाठ्यक्रम में शराब, गांजा, ओपिओइड, नींद की गोलियाँ और इनहेलेंट जैसी चीज़ें शामिल हैं, साथ ही महिलाओं और किशोरों जैसे खास समूहों में लत के इलाज पर भी ध्यान दिया गया है।

किन संस्थानों के ज़रिए

यह कार्यक्रम ड्रग डी-एडिक्शन प्रोग्राम के तहत छह केंद्रीय संस्थानों के ज़रिए चलेगा। इनमें राष्ट्रीय ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (NDDTC), एम्स नई दिल्ली (गाजियाबाद स्थित), निमहाँस बेंगलुरु, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, सीआईपी रांची, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली और एम्स भुवनेश्वर शामिल हैं। NDDTC, एम्स पूरे कार्यक्रम के क्रियान्वयन का समन्वय करेगा। ट्रेनिंग पूरी होने पर संबंधित संस्थान सर्टिफिकेट देंगे।

क्यों किया गया

जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नारकोटिक कंट्रोल पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029 पेश किया था। इस दस्तावेज़ में अलग-अलग मंत्रालयों की ज़िम्मेदारियाँ तय की गई हैं। इसके मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय को मार्च 2029 तक 10,000 सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करना है। मंत्रालय का लक्ष्य इस वित्त वर्ष 2,000, 2027-28 में 3,000 और 2028-29 में 5,000 सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करना है। मंत्रालय के अनुसार अब तक विभिन्न राज्यों से 800 से ज़्यादा नामांकन मिल चुके हैं, और सामाजिक न्याय मंत्रालय के सहयोग वाले नशा मुक्ति केंद्रों के लगभग 150 लोगों के अगले दो महीनों में ऑफलाइन ट्रेनिंग में शामिल होने की उम्मीद है।

आम लोगों के लिए क्या मतलब

यह आम नागरिकों के लिए कोई आवेदन वाली योजना नहीं है, इसलिए किसी को भी इसके लिए फॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं है। इसका असर यह हो सकता है कि नशा छुड़ाने का इलाज कराने वाले मरीज़ों को आगे ज़्यादा प्रशिक्षित कर्मियों की सेवा मिल सके। इस मौके पर ‘सब्सटेंस यूज़ डिसऑर्डर: मैनुअल फॉर फिजिशियन्स’ का दूसरा संस्करण भी जारी किया गया, जो डॉक्टरों को नशे की लत की पहचान और इलाज में मदद करेगा।

सवाल-जवाब

नशा मुक्ति ट्रेनिंग कार्यक्रम में कौन हिस्सा ले सकता है?

इसमें डॉक्टर, नर्स, काउंसलर, साइकोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर और दूसरे मेडिकल व स्वास्थ्य कर्मी शामिल हो सकते हैं जो नशे की लत का इलाज देने में लगे हैं। प्रतिभागियों को राज्य सरकारें नेशनल हेल्थ मिशन के ज़रिए और केंद्र सरकार अपनी सेवाओं के ज़रिए नामांकित करती हैं।

क्या आम नागरिक इस कार्यक्रम के लिए खुद आवेदन कर सकते हैं?

नहीं, यह आम नागरिकों के लिए खुला आवेदन नहीं है। यह सिर्फ नशा मुक्ति सेवाओं में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की ट्रेनिंग का कार्यक्रम है, और नामांकन सरकारी माध्यम से होता है।

ट्रेनिंग पूरी होने पर सर्टिफिकेट मिलेगा या नहीं?

हाँ, ट्रेनिंग पूरी होने पर संबंधित DAP संस्थान सर्टिफिकेट जारी करेंगे। ट्रेनिंग ऑनलाइन लाइव, अपनी गति से ऑनलाइन और ऑफलाइन, तीनों तरीकों से दी जाएगी।

यह ट्रेनिंग किन संस्थानों के ज़रिए चलाई जाएगी?

यह छह केंद्रीय संस्थानों के ज़रिए चलेगी, जिनमें NDDTC, AIIMS नई दिल्ली (गाजियाबाद स्थित), NIMHANS बेंगलुरु, PGIMER चंडीगढ़, CIP रांची, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली और AIIMS भुवनेश्वर शामिल हैं। NDDTC, AIIMS पूरे कार्यक्रम का समन्वय करेगा।

नशा मुक्त भारत का लक्ष्य कब तक है?

सरकार का लक्ष्य 2029 तक नशा मुक्त भारत है। इसी दिशा में नारकोटिक कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 बनाया गया है, जिसमें अलग-अलग मंत्रालयों की ज़िम्मेदारियाँ तय की गई हैं।

स्रोत: PIB, "केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने नशा मुक्ति सेवाओं में लगे चिकित्सा और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की", 26 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

यह रोज़मर्रा की सूचना आधिकारिक स्रोत से AI की मदद से लिखी गई और अपने-आप छपी; संपादक इसे छपने के बाद जाँचते हैं। गलती बताएँ