अपना ज़िला चुनें

सभी ज़िले: उत्तर प्रदेश · बिहार · मध्य प्रदेश · दिल्ली

EN

MPAPCET पर प्लेसमेंट के नाम पर करोड़ों भुगतान का दावा गलत, मंत्रालय ने जारी की तथ्यात्मक रिपोर्ट

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को एक तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी कर कहा कि MPAPCET ने बिना प्लेसमेंट सत्यापन के करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं किया। यह बयान उन लोगों के लिए है जो SC कौशल प्रशिक्षण योजना से जुड़े हैं या इसकी खबरें पढ़ रहे हैं।

WhatsApp पर भेजें4 मिनट

आपके लिए इसका मतलब

आम नागरिकों के पैसे या रोजगार पर इसका सीधा असर नहीं है। यह मंत्रालय की ओर से एक अखबार की खबर का जवाब है। अगर आप SC कौशल प्रशिक्षण योजना के प्रशिक्षु हैं, तो आपके प्रशिक्षण और भुगतान से जुड़ी जानकारी परिषद के पोर्टल से मिलती है।

मुख्य बातें

  • SC उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 3,241.37 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।
  • 2021-22 में MPAPCET को कुल 2,945.37 लाख रुपये दिए गए — 1,296.00 लाख रुपये (26 नवंबर 2021 का आदेश 4695) और 1,649.37 लाख रुपये (25 मार्च 2022 का आदेश 10283)।
  • 34 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं के साथ अनुबंध हुए, जिनमें से 6 ने काम शुरू नहीं किया; 28 संस्थानों ने 4,952 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया।
  • MSDE की 4 दिसंबर 2020 की अधिसूचना 349 के अनुसार भुगतान तीन किश्तों में: 30% प्रशिक्षण शुरू होने पर, 40% प्रमाणीकरण पर, 30% 70% सत्यापित रोजगार पर।
  • तीसरी किश्त किसी संस्थान को नहीं दी गई, क्योंकि पोर्टल पर कोई भुगतान दावा नहीं बना।

क्या हुआ है

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को एक तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट उस खबर के जवाब में है जो 31 अक्टूबर 2026 को भोपाल के ‘सेंट्रल क्रॉनिकल’ में छपी थी। उस खबर में दावा किया गया था कि मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (MPAPCET) ने प्लेसमेंट डेटा की पुष्टि किए बिना ही प्लेसमेंट के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया। मंत्रालय ने इस दावे को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है।

पैसा कहां से आया और कितना

मंत्रालय के अनुसार आयुक्त कार्यालय, अनुसूचित जाति विकास विभाग ने “अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता” मद के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण के लिए 3,241.37 लाख रुपये स्वीकृत किए। इस राशि के विरुद्ध 2021-22 के दौरान MPAPCET को कुल 2,945.37 लाख रुपये दिए गए। इसमें 1,296.00 लाख रुपये 26 नवंबर 2021 के आदेश क्रमांक 4695 के तहत और 1,649.37 लाख रुपये 25 मार्च 2022 के आदेश क्रमांक 10283 के तहत शामिल थे।

प्रशिक्षण कैसे हुआ

MPAPCET ने 2021-22 के लिए SC वर्ग के गरीबी रेखा से नीचे (BPL) रहने वाले परिवारों के लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) जारी किया। चयन प्रक्रिया के बाद 34 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं के साथ अनुबंध हुए और उन्हें कार्य आदेश दिए गए। इनमें से छह संस्थाओं ने काम शुरू ही नहीं किया। बाकी 28 संस्थानों ने 4,952 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया। मंत्रालय का कहना है कि परिषद का प्रशिक्षण कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के मानकों के अनुरूप है और सारी गतिविधियां एक समर्पित पोर्टल से चलती हैं, जहां पंजीकरण, रोज की उपस्थिति, मूल्यांकन और प्लेसमेंट डेटा अपलोड होता है।

भुगतान के नियम क्या हैं

MSDE की 4 दिसंबर 2020 की अधिसूचना संख्या 349 की अनुसूची IV के खंड 2.1.1 के अनुसार बैच मोड में प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षण प्रदाताओं को तीन किश्तों में भुगतान होता है। पहली किश्त बैच राशि का 30% है, जो प्रशिक्षण शुरू होने पर मिलती है। दूसरी किश्त 40% है, जो प्रमाणीकरण पूरा होने पर मिलती है; अग्रिम भुगतान समायोजित करने के बाद प्रमाणित उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर भुगतान होता है। तीसरी किश्त 30% है, जो 70% सत्यापित रोजगार मिलने पर दी जाती है, जिसमें डेस्क सत्यापन और प्लेसमेंट सत्यापन के साथ तीन महीने तक लगातार रोजगार शामिल है।

किसे क्या मिला

मंत्रालय के अनुसार पहली किश्त तब दी जाती है जब प्रशिक्षुओं के भौतिक सत्यापन के बाद प्रशिक्षण बैच शुरू होता है। दूसरी किश्त प्रशिक्षण पूरा होने और मूल्यांकन के बाद दी जाती है। यह मूल्यांकन राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) द्वारा नामित संस्थाएं करती हैं, और इसके लिए प्रशिक्षु की कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि संस्थानों को सिर्फ पहली और दूसरी किश्त मिली है और इनमें से कोई भी प्लेसमेंट से जुड़ी नहीं है।

तीसरी किश्त क्यों नहीं दी गई

मंत्रालय के अनुसार संस्थानों ने प्लेसमेंट की जानकारी हार्ड-कॉपी में जॉब ऑफर या ऑफर लेटर के आधार पर दी है, लेकिन इस तरह की जानकारी से तीसरी किश्त जारी नहीं हो सकती। इसके लिए संस्थानों को निर्धारित मानदंडों के अनुसार पोर्टल पर प्लेसमेंट का विवरण अपलोड करना होता है, तभी पोर्टल भुगतान का दावा बनाता है। मंत्रालय का कहना है कि किसी भी संस्थान के लिए ऐसा दावा नहीं बना, इसलिए तीसरी किश्त का कोई भुगतान नहीं हुआ। तीसरी किश्त तब दी जाएगी जब उम्मीदवार प्रशिक्षण पूरा करके नौकरी शुरू कर लेंगे; फिलहाल संस्थाएं प्लेसमेंट दिलाने में मदद कर रही हैं।

सवाल-जवाब

MPAPCET क्या है?

MPAPCET का पूरा नाम मध्य प्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद है। यह मध्य प्रदेश में रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जुड़ी परिषद है, जिसने 2021-22 में SC वर्ग के BPL परिवारों के लाभार्थियों को प्रशिक्षण देने के लिए संस्थाओं को काम दिया।

क्या MPAPCET ने प्लेसमेंट के आधार पर करोड़ों का भुगतान किया?

नहीं। मंत्रालय ने कहा है कि यह दावा पूरी तरह गलत और निराधार है। संस्थानों को सिर्फ पहली और दूसरी किश्त मिली है, और ये दोनों प्लेसमेंट से जुड़ी नहीं हैं।

तीसरी किश्त क्यों नहीं दी गई?

तीसरी किश्त प्लेसमेंट पर निर्भर है और इसके लिए संस्थानों को पोर्टल पर प्लेसमेंट का विवरण अपलोड करना होता है। मंत्रालय के अनुसार किसी भी संस्थान के लिए ऐसा भुगतान दावा नहीं बना, इसलिए तीसरी किश्त नहीं दी गई।

कितने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण मिला?

मंत्रालय के अनुसार 28 संस्थानों ने 4,952 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया। 34 संस्थाओं के साथ अनुबंध हुआ था, जिनमें से 6 ने काम शुरू नहीं किया।

तीसरी किश्त कब मिलेगी?

मंत्रालय ने कहा है कि तीसरी किश्त तब दी जाएगी जब उम्मीदवार प्रशिक्षण पूरा करके नौकरी शुरू कर लेंगे। फिलहाल संस्थाएं प्लेसमेंट दिलाने में मदद कर रही हैं।

स्रोत: PIB, "सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 31 अक्टूबर, 2026 को सेंट्रल क्रॉनिकल (भोपाल) में प्रकाशित एक रिपोर्ट में प्रकाशित दावे के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी की", 31 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

आधिकारिक सूचना से मिलाया: 1 नवंबर 2026. यह ख़बर आधिकारिक सूचना से AI की मदद से लिखी गई और प्रकाशन से पहले संपादक ने जाँची। गलती बताएँ