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वित्त मंत्रालय ने IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन की बोली प्रक्रिया पर दी सफ़ाई

वित्त मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2026 को IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन की बोली प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी किया। यह बयान बैंक के शेयरधारकों और निवेशकों से जुड़ी प्रक्रिया समझाने के लिए है, आम जमाकर्ताओं के रोज़मर्रा के काम से इसका सीधा ताल्लुक नहीं है।

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आपके लिए इसका मतलब

यह सफ़ाई उस प्रक्रिया के बारे में है जिससे IDBI Bank में सरकार और LIC की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी हो रही है। आम खाताधारकों को कुछ करने की ज़रूरत नहीं है; उनकी जमा, खाता या बैंकिंग सेवाओं में बदलाव की कोई बात इस विज्ञप्ति में नहीं कही गई है। यह जानकारी मुख्य रूप से निवेशकों और बाज़ार से जुड़े लोगों के लिए है।

मुख्य बातें

  • विज्ञप्ति की तिथि 29 अक्टूबर 2026 है।
  • पहली या प्रारंभिक बोली प्रक्रिया वित्त वर्ष 2025-26 में DIPAM ने अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं से चलाई थी।
  • 14 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट में कहा गया था कि बोली के लिए कोई पूर्व निर्धारित मानदंड नहीं है।
  • 16 अगस्त 2017 को CCEA ने CGD को प्रक्रिया से विचलन सहित कठिनाइयाँ दूर करने का अधिकार दिया था।
  • विवादित कर मांगों पर संभावित देयता 627 करोड़ रुपये थी, जबकि बोली की निर्धारित कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।
  • 2019 में LIC द्वारा बहुमत हिस्सेदारी लेने के बाद IDBI सरकारी नियंत्रण वाली बैंकिंग कंपनी बनी।

यह विज्ञप्ति किस बारे में है

वित्त मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2026 को IDBI Bank लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया पर एक स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें बताया गया है कि बोली प्रक्रिया कैसे चली, मूल्यांकन कैसे हुआ और किसने कौन-से फ़ैसले लिए।

पहली बोली प्रक्रिया कैसी थी

विज्ञप्ति के अनुसार DIPAM ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं के तहत पहली या प्रारंभिक बोली प्रक्रिया चलाई थी। यह सांकेतिक दिशानिर्देशों के रूप में थी, कठोर नियम या विनियम नहीं। प्रस्तावना में ही कहा गया था कि इस प्रक्रिया को कठोर कानूनी ढांचा न माना जाए, क्योंकि समय पर लेन-देन पूरा करने के लिए ज़रूरत पड़ने पर इसमें बदलाव हो सकता है।

बोली और मूल्यांकन का तरीका

14 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट का हवाला देते हुए विज्ञप्ति कहती है कि बोली लगाने के लिए कोई पूर्व निर्धारित मानदंड नहीं है। बोलीदाता खुद मूल्यांकन करते हैं और गोपनीय तरीके से बोली जमा करते हैं। कंपनी का उचित मूल्यांकन करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियाँ नियुक्त की जाती हैं, जिनका इस्तेमाल बोलियों की तर्कसंगतता जाँचने के तुलनात्मक आधार के रूप में होता है। इसलिए बोली में लिखा मूल्य और तुलनात्मक मूल्यांकन एक-दूसरे से कम या ज़्यादा हो सकते हैं।

आरक्षित मूल्य से कम बोली पर क्या नियम है

आरएफपी के पैरा 5.3.6(iii) में पहले से प्रावधान है कि अगर सबसे ऊंची बोली आरक्षित मूल्य से कम है, तो भारत सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी। विज्ञप्ति के मुताबिक इस पर बाद में सवाल नहीं उठाया जाएगा। DIPAM के भीतर ऐसी स्थिति के लिए कोई तय प्रक्रिया नहीं है; इस काम के लिए कैबिनेट कमेटी ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने विनिवेश सचिवों के कोर ग्रुप (CGD) को विशेष शक्तियाँ दी हैं।

CCEA का 2017 का फ़ैसला

16 अगस्त 2017 की बैठक में CCEA ने ‘रणनीतिक विनिवेश के लिए प्रक्रिया और तंत्र - इसका प्रत्यायोजन’ शीर्षक नोट मंज़ूर किया था। इसमें CGD को प्रक्रिया से विचलन सहित सभी कठिनाइयाँ दूर करने का अधिकार दिया गया, ताकि मंज़ूर किए गए रणनीतिक विनिवेश लेन-देन लागू हो सकें। इन्हीं शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे या सर्वोत्तम प्रस्ताव दौर की प्रक्रिया CGD ने तय की। विज्ञप्ति कहती है कि आरक्षित मूल्य में न कमी की गई और न बढ़ोतरी, और पहली बोलियों को मंज़ूरी न मिलने के बाद पहला दौर अपने आप खत्म हो गया।

मूल्यांकन की समीक्षा और गोपनीयता

सर्वोत्तम प्रस्ताव मांगने से पहले अप्रैल 2026 में CGD ने पूरी मूल्यांकन पद्धति की समीक्षा की। 31 मार्च 2026 को खत्म हुए वित्तीय खाते अप्रैल के अंत में सार्वजनिक हुए थे, इसलिए स्वतंत्र एजेंसियों ने मई 2026 में संशोधित मूल्यांकन पर काम शुरू किया। प्रक्रिया में दोहरी गोपनीयता रही: बोलीदाताओं को मूल्यांकन की जानकारी नहीं थी और मूल्यांकनकर्ताओं ने बोलियाँ नहीं देखीं। पूरी जानकारी सिर्फ CGD को मिलती है।

मूल्यांकन में कौन-सी विधि अपनाई गई

विज्ञप्ति के अनुसार मूल्यांकन दो अलग सलाहकारों से, अलग-अलग तरीकों से और स्वतंत्र रूप से कराया गया। बाजार गुणक विधि के दो उप-प्रकार हैं: तुलनीय कंपनी विधि और तुलनीय लेन-देन विधि। उपयुक्त तुलनीय लेन-देन न होने पर तुलनीय कंपनियों की विधि इस्तेमाल हुई, जो इस मामले में सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक थे। विज्ञप्ति याद दिलाती है कि IDBI 2019 तक सरकारी स्वामित्व वाली बैंकिंग कंपनी थी; 2019 में LIC द्वारा बहुमत हिस्सेदारी लेने के बाद यह सरकारी नियंत्रण वाली कंपनी बन गई।

विवादित कर मांगों का मुद्दा

संपत्ति मूल्यांकनकर्ता ने विवादित कर मांगों के लिए अतिरिक्त मूल्य भी जोड़ा, जिसे योग्य बोलीदाताओं की सामान्य मांग मानकर समायोजित किया गया। विज्ञप्ति कहती है कि इस मद पर संभावित देयता केवल 627 करोड़ रुपये थी, जबकि बोली की निर्धारित कीमत में 3,917 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, जिससे भारत सरकार और LIC के लिए लेन-देन का मूल्य बढ़ गया।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है

यह विज्ञप्ति बैंक की बिक्री प्रक्रिया और उसके मूल्यांकन की सफ़ाई है। इसमें आम जमाकर्ताओं, खाताधारकों या बैंकिंग सेवाओं से जुड़े किसी बदलाव का ज़िक्र नहीं है, इसलिए आम लोगों को इससे जुड़कर कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार और LIC ने पुनर्गठन के बाद भविष्य में मूल्य बढ़ने का फ़ायदा उठाने के लिए अपनी बची हुई हिस्सेदारी अपने पास रखी है।

सवाल-जवाब

IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन पर वित्त मंत्रालय ने क्या कहा?

मंत्रालय ने कहा कि बोली प्रक्रिया सांकेतिक दिशानिर्देशों पर चली, कठोर नियमों पर नहीं। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि आरक्षित मूल्य में न कमी की गई और न बढ़ोतरी।

क्या इसका असर मेरे IDBI बैंक खाते पर पड़ेगा?

विज्ञप्ति में खाताधारकों या जमा पर किसी बदलाव का ज़िक्र नहीं है। यह सफ़ाई बोली और मूल्यांकन की प्रक्रिया के बारे में है।

बोली लगाने के लिए कोई पहले से तय मानदंड है?

नहीं। 14 अक्टूबर 2026 के प्रेस नोट के अनुसार बोली के लिए कोई पूर्व निर्धारित मानदंड नहीं है। बोलीदाता खुद मूल्यांकन करके गोपनीय तरीके से बोली जमा करते हैं।

अगर सबसे ऊंची बोली आरक्षित मूल्य से कम हो तो क्या होता है?

आरएफपी के पैरा 5.3.6(iii) के अनुसार ऐसी स्थिति में भारत सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी। विज्ञप्ति कहती है कि इस पर बाद में सवाल नहीं उठाया जाएगा।

मूल्यांकन कैसे किया गया?

मूल्यांकन दो अलग सलाहकारों से, अलग-अलग तरीकों से और स्वतंत्र रूप से कराया गया। उपयुक्त तुलनीय लेन-देन न होने पर तुलनीय कंपनियों की विधि इस्तेमाल की गई, जो इस मामले में सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक थे।

स्रोत: PIB, "आईडीबीआई बैंक लिमिटेड के रणनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण", 29 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

यह रोज़मर्रा की सूचना आधिकारिक स्रोत से AI की मदद से लिखी गई और अपने-आप छपी; संपादक इसे छपने के बाद जाँचते हैं। गलती बताएँ