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SMILE योजना: इंदौर में बेघर महिला के पुनर्वास की कहानी, अब हर महीने लगभग 8,000 रुपये कमा रहीं

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 28 अक्टूबर 2026 को SMILE योजना के तहत इंदौर में एक बेघर महिला के पुनर्वास की जानकारी दी। यह जानकारी उन लोगों के लिए है जो बेघर हैं या पुनर्वास और आजीविका सहायता की जरूरत रखते हैं।

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आपके लिए इसका मतलब

यह खबर आम लोगों के लिए सीधे तौर पर कोई नई शर्त या आवेदन की तारीख नहीं बताती। यह बताती है कि SMILE योजना के तहत बेघर और जरूरतमंद लोगों को आश्रय, इलाज, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कौशल सिखाकर आजीविका तक पहुंचाया जाता है। अगर आप या आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है, तो इस योजना के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

मुख्य बातें

  • 16 मार्च 2024 को इंदौर के जिला कोर्ट स्थित शनि मंदिर परिसर से PRAWES की टीम ने महिला को रेस्क्यू किया।
  • महिला को अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गंभीर एनीमिया का इलाज और दोनों आंखों का मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ।
  • SMILE योजना के तहत सुरक्षित आवास, चिकित्सीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास सहायता दी गई।
  • जुलाई 2025 में महिला ने राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) की कार्यशाला में हिस्सा लिया।
  • अब वह हस्तशिल्प बेचकर हर महीने लगभग 8,000 रुपये कमाती हैं; पहले भीख से रोज करीब 200 रुपये मिलते थे।

क्या हुआ है

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 28 अक्टूबर 2026 को एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें बताया गया है कि SMILE योजना के तहत मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बेघर महिला को पुनर्वास और आजीविका सहायता मिली। विज्ञप्ति में महिला का नाम बदलकर मीरा ठाकुर बताया गया है।

SMILE योजना क्या है

SMILE का पूरा नाम ‘आजीविका एवं उद्यम के लिए वंचित व्यक्तियों को सहायता’ है। यह मंत्रालय की योजना है, जिसका मकसद जरूरतमंद लोगों को पुनर्वास और आजीविका के जरिए सशक्त बनाना है। विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना में सुरक्षित आवास, इलाज, मनोवैज्ञानिक परामर्श और लगातार पुनर्वास सहायता शामिल है।

महिला की कहानी

विज्ञप्ति के मुताबिक महिला ने कक्षा ग्यारहवीं पास की थी और पहले फूलों की माला बनाने तथा खान-पान में सहायक का काम किया था। पारिवारिक गतिरोध के बाद उन्हें गंभीर आर्थिक और व्यक्तिगत परेशानियों का सामना करना पड़ा। जमापूंजी और जरूरी दस्तावेज खोने के बाद वे बीमार पड़ीं और बेघर हो गईं। आय का स्रोत न होने पर उन्होंने भीख मांगनी शुरू कर दी।

रेस्क्यू और इलाज

16 मार्च 2024 को परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसायटी (PRAWES) की टीम ने इंदौर के जिला कोर्ट स्थित शनि मंदिर परिसर से उन्हें रेस्क्यू किया। उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां गंभीर एनीमिया का इलाज हुआ और पोषण पर ध्यान दिया गया। दोनों आंखों का मोतियाबिंद ऑपरेशन भी सफल हुआ।

कौशल और आजीविका

स्वास्थ्य सुधरने पर उन्होंने योग, ध्यान और संगीत चिकित्सा सत्रों में हिस्सा लिया। उन्होंने पुरानी साड़ियों से कालीन और डोरमैट बनाना, सिलाई, मोती की माला, अगरबत्ती और गोबर से मूर्तियां, दीये व हवन कुंड बनाना सीखा। जुलाई 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) की कार्यशाला में भाग लिया। अब वे पुनर्वास केंद्र में रसोई संभालती हैं और लगभग 50-60 लाभार्थियों के लिए नाश्ता बनाती हैं। मेलों और प्रदर्शनियों में अपने हस्तशिल्प बेचकर वे हर महीने लगभग 8,000 रुपये कमाती हैं।

आम लोगों के लिए इसका मतलब

इस विज्ञप्ति में आम लोगों के लिए कोई आवेदन प्रक्रिया, तारीख या पात्रता की शर्त नहीं बताई गई है। यह एक पुनर्वास की सफलता की जानकारी है। जो लोग ऐसी सहायता के बारे में जानना चाहते हैं, वे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय या अपने जिले के संबंधित विभाग से जानकारी ले सकते हैं।

सवाल-जवाब

SMILE योजना क्या है?

SMILE का पूरा नाम 'आजीविका एवं उद्यम के लिए वंचित व्यक्तियों को सहायता' है। यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की योजना है, जिसके तहत पुनर्वास और आजीविका सहायता दी जाती है।

SMILE योजना में क्या-क्या सहायता मिलती है?

विज्ञप्ति के अनुसार सुरक्षित आवास, चिकित्सीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और निरंतर पुनर्वास सहायता मिलती है। साथ ही कौशल सीखने और आजीविका कमाने में भी मदद मिलती है।

क्या आम लोगों को कुछ करना है?

नहीं, इस विज्ञप्ति में आम लोगों के लिए कोई आवेदन, तारीख या शर्त नहीं बताई गई है। यह एक पुनर्वास की सफलता की जानकारी है।

यह घटना कहां की है?

यह मध्य प्रदेश के इंदौर की है। 16 मार्च 2024 को जिला कोर्ट स्थित शनि मंदिर परिसर से महिला को रेस्क्यू किया गया था।

स्रोत: PIB, "सड़क से स्वावलंबन तक", 28 अक्टूबर 2026. मूल सूचना देखें

यह रोज़मर्रा की सूचना आधिकारिक स्रोत से AI की मदद से लिखी गई और अपने-आप छपी; संपादक इसे छपने के बाद जाँचते हैं। गलती बताएँ