# OECM 2026: सरकार ने जैव विविधता बचाने वाले इलाकों को मान्यता देने के दिशानिर्देश जारी किए

URL: https://kasba.co.in/story/oecm-2026-government-issues-guidelines-to-recognise-biodiver
Language: hi · Section: Nation · Published: 2026-11-05
Source: PIB, "केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित सीबीडी सीओपी-17 में 'भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (आई-ओईसीएम), 2026' के निर्धारण के लिए दिशानिर्देश जारी किए", 2026-11-04, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2332846

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 3 नवंबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवन में CBD COP-17 के दौरान 'भारत के OECM 2026' तय करने के दिशानिर्देश जारी किए। इनसे उन इलाकों को मान्यता मिल सकेगी जो कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्र नहीं हैं, पर जैव विविधता बचाने में काम आ रहे हैं।

## आपके लिए इसका मतलब

आम नागरिकों को इससे सीधे कोई फ़ॉर्म नहीं भरना है और न ही कोई पैसा मिलना है। आवेदन केंद्र या राज्य सरकार के विभाग, एजेंसियां, संस्थान, स्थानीय स्व-शासन और जैव विविधता प्रबंधन समितियां ही राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को भेज सकती हैं। अगर आपके इलाके में पवित्र उपवन, जैव विविधता पार्क या समुदाय द्वारा संभाला जाने वाला तालाब है, तो अपनी पंचायत या जैव विविधता प्रबंधन समिति से बात कर सकते हैं। मान्यता मिलने से उस जगह के मालिकाना हक़, कानूनी दर्जे या चल रही गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं होगा।

## मुख्य बातें

- दिशानिर्देश 3 नवंबर 2026 को येरेवन, आर्मेनिया में जारी हुए
- ये MoEFCC ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के साथ मिलकर बनाए
- मान्यता के लिए चार शर्तें अनिवार्य हैं, जैसे क्षेत्र कानूनी रूप से संरक्षित न हो
- NBA आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर उसे राज्य जैव विविधता बोर्ड को भेजेगा
- बोर्ड 30 दिनों के भीतर अपनी सिफ़ारिश NBA को भेजेगा
- हर मान्यता प्राप्त स्थल का मूल्यांकन कम से कम हर पांच साल में एक बार होगा

## क्या हुआ है

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 3 नवंबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवन में 'कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी' (CBD COP-17) के 17वें सम्मेलन से इतर एक कार्यक्रम में "भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (OECM) 2026 के निर्धारण के लिए दिशानिर्देश" जारी किए। कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC), राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने किया।

## OECM क्या है

मंत्री के अनुसार OECM संरक्षण का एक नया दौर है, जिसमें वनों और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर प्रभावी लैंडस्केप प्रबंधन के ज़रिए जैव विविधता का 'इन-सीटू' संरक्षण किया जाता है। ये दिशानिर्देश MoEFCC ने NBA के साथ मिलकर तैयार किए हैं। ये ऐसे क्षेत्रों को पहचानने और उनकी रिपोर्टिंग करने का ढांचा देते हैं जो कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्रों के बाहर हैं, पर जैव विविधता के संरक्षण में सकारात्मक और दीर्घकालिक परिणाम दे रहे हैं।

## किन इलाकों पर लागू होगा

दिशानिर्देशों में ज़मीनी, आंतरिक जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर जैव विविधता पार्क, पवित्र उपवन, समुदाय द्वारा प्रबंधित सिंचाई टैंक, सीग्रास और सीवीड वाले क्षेत्र, तथा मछली पकड़ने पर मौसमी रोक वाले इलाके शामिल हो सकते हैं।

## मान्यता की शर्तें

चार शर्तें अनिवार्य हैं। पहला, क्षेत्र कानूनी रूप से संरक्षित या आरक्षित न हो। दूसरा, उसका संचालन और प्रबंधन केंद्र या राज्य सरकार के ढांचे के तहत, या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्थानीय संस्थाओं जैसे पंचायतों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों द्वारा हो। तीसरा, सीमाएं स्पष्ट हों और यह संरक्षित और परिरक्षित क्षेत्रों के विश्व डेटाबेस में पहले से दर्ज किसी क्षेत्र से ओवरलैप न हो। चौथा, मान्यता से उस क्षेत्र की मौजूदा गतिविधियों, शासन व्यवस्था या नियमों में कोई बदलाव न आए। कोई क्षेत्र अपनी जैव विविधता के महत्व, पारिस्थितिकी तंत्र से मिलने वाली सेवाओं और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर भी मान्यता के योग्य हो सकता है।

## आवेदन कैसे होगा

केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, एजेंसियां और संस्थान, स्थानीय स्व-शासन और जैव विविधता प्रबंधन समितियां NBA को आवेदन जमा कर सकती हैं। NBA प्रारंभिक जांच कर 30 दिनों के भीतर आवेदन संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्ड या केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को भेजेगा। वह बोर्ड या परिषद जानकारी की पुष्टि कर 30 दिनों के भीतर सिफ़ारिश NBA को भेजेगी। अंतर-विभागीय OECM समिति के सहयोग से NBA, MoEFCC के साथ समन्वय करके अंतिम फ़ैसला लेगा। हर मान्यता प्राप्त स्थल के लिए मापने योग्य संकेतकों वाला निगरानी ढांचा होगा, जिसका मूल्यांकन कम से कम हर पांच साल में एक बार होगा।

## क्या नहीं बदलेगा

दिशानिर्देशों में साफ है कि OECM के रूप में मान्यता मिलने से कोई क्षेत्र 'संरक्षित क्षेत्र' नहीं बन जाता और उसके स्वामित्व या कानूनी दर्जे में कोई बदलाव नहीं आता। इनमें NBA, राज्य जैव विविधता बोर्ड और संबंधित विभागों के क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों का भी प्रावधान है।

## आगे क्या होगा

भारत सरकार ने इन दिशानिर्देशों को छह प्रदर्शन क्षेत्रों में लागू करने के लिए एक GEF-8 परियोजना शुरू की है, जिसे 29 दिसंबर 2025 को स्थानीय परियोजना मूल्यांकन समिति ने मंज़ूरी दी थी। यह परियोजना 15 मई 2026 से 15 मई 2032 तक चलेगी और इसका कुल बजट 60.79 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इसका लक्ष्य OECM और अन्य संरक्षण पहलों के ज़रिए 3 प्रतिशत और भूमि तथा समुद्री क्षेत्र जोड़ना है, जो पहले से संरक्षित 27 प्रतिशत क्षेत्र के अतिरिक्त होगा। परियोजना के तहत 50,000 हेक्टेयर नए स्थलीय संरक्षण क्षेत्र बनाने, कम से कम 5,000 हेक्टेयर खराब भूमि बहाल करने और कम से कम 50,000 लोगों को सीधा लाभ देने का लक्ष्य है, जिनमें आधी महिलाएं होंगी।

## सवाल-जवाब

**OECM क्या है?**
OECM का मतलब है अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपाय। यानी ऐसे इलाके जो कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्र नहीं हैं, लेकिन वहां जैव विविधता का संरक्षण असल में हो रहा है। मंत्री के अनुसार यह वनों और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर प्रभावी लैंडस्केप प्रबंधन से जैव विविधता का 'इन-सीटू' संरक्षण है।

**OECM के लिए आवेदन कौन कर सकता है?**
केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, एजेंसियां और संस्थान, स्थानीय स्व-शासन और जैव विविधता प्रबंधन समितियां NBA को आवेदन जमा कर सकती हैं। आम नागरिक के लिए सीधे आवेदन की बात नहीं कही गई है।

**मान्यता मिलने के लिए कौन-कौन सी शर्तें हैं?**
चार शर्तें अनिवार्य हैं। क्षेत्र कानूनी रूप से संरक्षित या आरक्षित न हो; उसका संचालन सरकारी ढांचे या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्थानीय संस्थाओं जैसे पंचायतों और जैव विविधता प्रबंधन समितियों द्वारा हो; सीमाएं स्पष्ट हों और यह विश्व डेटाबेस में दर्ज किसी क्षेत्र से ओवरलैप न हो; और मान्यता से वहां की मौजूदा गतिविधियों, शासन या नियमों में बदलाव न आए।

**OECM मान्यता मिलने से ज़मीन पर मेरा हक़ बदल जाएगा?**
नहीं। दिशानिर्देशों में साफ कहा गया है कि OECM के रूप में मान्यता मिलने से कोई क्षेत्र 'संरक्षित क्षेत्र' नहीं बन जाता और उसके स्वामित्व या कानूनी दर्जे में कोई बदलाव नहीं आता।

**आवेदन का फ़ैसला कैसे होगा?**
NBA प्रारंभिक जांच कर 30 दिनों के भीतर आवेदन संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्ड या केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को भेजेगा। वह बोर्ड या परिषद जानकारी की पुष्टि कर 30 दिनों के भीतर सिफ़ारिश NBA को भेजेगी। अंतर-विभागीय OECM समिति के सहयोग से NBA, MoEFCC के साथ समन्वय करके अंतिम फ़ैसला लेगा।

कस्बा डेस्क, Kasba. यह रोज़मर्रा की सूचना आधिकारिक स्रोत से AI की मदद से लिखी गई और अपने-आप छपी; संपादक इसे छपने के बाद जाँचते हैं।
