# नमस्ते योजना से मिले आयुष्मान कार्ड ने झांसी के कचरा बीनने वाले मोहन लाल का इलाज कराया

URL: https://kasba.co.in/story/namaste-scheme-s-ayushman-card-helped-jhansi-ragpicker-mohan
Language: hi · Section: Schemes · Published: 2026-10-27
Places: उत्तर प्रदेश, झाँसी
Source: PIB, "आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक: मोहन लाल का प्रेरणादायक सफर", 2026-10-27, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2329229

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2026 को बताया कि झांसी के कचरा बीनने वाले एक श्रमिक को नमस्ते योजना के ज़रिए आयुष्मान कार्ड मिला, जिससे उनका दिल का इलाज मुफ़्त हुआ। यह खबर उन कचरा बीनने वाले श्रमिकों के लिए है जो नमस्ते योजना में पंजीकृत हैं।

## आपके लिए इसका मतलब

अगर आप कचरा बीनने का काम करते हैं और नमस्ते योजना में पंजीकृत हैं, तो आपको आयुष्मान भारत-पीएम-जेएवाई के तहत आयुष्मान कार्ड मिल सकता है। इस कार्ड से योजना के तहत इलाज का खर्च वहन होता है। जो लोग इस योजना में पंजीकृत नहीं हैं, उन पर इस खबर का सीधा असर नहीं है।

## मुख्य बातें

- मोहन लाल (बदला हुआ नाम) झांसी, उत्तर प्रदेश के 65 वर्षीय कचरा बीनने वाले श्रमिक हैं।
- उनकी रोज़ की कमाई 101 से 250 रुपये तक थी।
- नमस्ते योजना के कचरा बीनने वाले घटक में पंजीकरण के बाद उन्हें आयुष्मान भारत-पीएम-जेएवाई का आयुष्मान कार्ड मिला।
- 8 मई 2026 को नई दिल्ली के एम्स में उनके दिल के अवरोध का इलाज हुआ।
- इलाज का पूरा खर्च योजना के तहत वहन किया गया।

## क्या हुआ

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2026 को एक विज्ञप्ति में बताया कि उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी 65 वर्षीय कचरा बीनने वाले श्रमिक मोहन लाल (बदला हुआ नाम) का दिल का इलाज योजना के सहयोग से हुआ। उन्हें नमस्ते योजना के कचरा बीनने वाले श्रमिकों से जुड़े घटक के तहत पंजीकरण के बाद आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) का आयुष्मान कार्ड मिला था।

## इलाज की कहानी

विज्ञप्ति के अनुसार मोहन लाल लंबे समय तक संविदा सफाई कर्मचारी और कचरा बीनने वाले के रूप में काम करते रहे। इस काम से उन्हें रोज़ केवल 101 से 250 रुपये तक की कमाई होती थी, जिससे परिवार की बुनियादी ज़रूरतें ही मुश्किल से पूरी होती थीं। इसी बीच उनके दिल में गंभीर अवरोध का पता चला, जिसके इलाज पर भारी खर्च आने की चिंता परिवार के लिए बड़ी बात बन गई।

आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद 8 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका इलाज संभव हो सका। विज्ञप्ति के मुताबिक उपचार का पूरा खर्च योजना के तहत वहन किया गया।

## इलाज के बाद क्या बदला

सफल इलाज के बाद मोहन लाल स्वस्थ हो गए और दोबारा काम पर लौटकर परिवार का भरण-पोषण करने लगे। विज्ञप्ति कहती है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिलने से आपातकालीन चिकित्सा का आर्थिक बोझ कम हुआ और उन्हें अपनी सेहत सुधारने पर ध्यान देने का मौका मिला।

## किसे फ़ायदा होगा

यह खबर उन कचरा बीनने वाले श्रमिकों और समाज के अन्य कमज़ोर वर्ग के श्रमिकों के लिए मायने रखती है, जो नमस्ते योजना में पंजीकृत हैं और जिनके पास आयुष्मान कार्ड है। विज्ञप्ति के अनुसार ऐसी योजनाएं ज़रूरी इलाज में आने वाली बाधाएं दूर करने और लोगों की गरिमा बनाए रखने में मदद करती हैं।

## आम लोगों पर असर

जो लोग इस योजना में पंजीकृत नहीं हैं, उन पर इस विज्ञप्ति का सीधा असर नहीं है। यह किसी नई योजना या नई समय-सीमा की घोषणा नहीं है, बल्कि एक श्रमिक के अनुभव के ज़रिए योजना के लाभ को बताया गया है।

## सवाल-जवाब

**नमस्ते योजना क्या है?**
नमस्ते का पूरा नाम नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम है। इस योजना में कचरा बीनने वाले श्रमिकों से जुड़ा एक घटक है, जिसके तहत पंजीकृत श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड मिलता है।

**आयुष्मान कार्ड से क्या फ़ायदा मिलता है?**
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मिले आयुष्मान कार्ड से योजना के अंतर्गत इलाज का खर्च वहन होता है। मोहन लाल के मामले में एम्स में हुए इलाज का पूरा खर्च योजना ने वहन किया।

**क्या मोहन लाल ने इलाज के लिए पैसे दिए?**
नहीं, विज्ञप्ति के अनुसार उनके उपचार का पूरा खर्च योजना के तहत वहन किया गया था।

**क्या यह खबर सभी लोगों पर लागू होती है?**
नहीं, यह खबर खास तौर पर नमस्ते योजना में पंजीकृत कचरा बीनने वाले श्रमिकों से जुड़ी है। आम लोगों पर इसका सीधा असर नहीं है।

कस्बा डेस्क, Kasba. यह रोज़मर्रा की सूचना आधिकारिक स्रोत से AI की मदद से लिखी गई और अपने-आप छपी; संपादक इसे छपने के बाद जाँचते हैं।
